मेरा सामाजिक यात्रा
मेरा सामाजिक यात्रा
मेरा जन्म कोदागाँव में हुआ, जो छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतर्गत आता है। कोदागाँव जिले के बड़े गाँवों में से एक है और इसी गाँव की मिट्टी में मेरा बचपन बीता। मेरा बचपन गाँव की सरलता, सामाजिक वातावरण और सामुदायिक जीवन के बीच गुजरा।
मेरे पिता जी का देहांत मेरे बचपन में ही हो गया था। उनके न रहने के कारण मेरे पालन-पोषण और जीवन की जिम्मेदारियाँ मेरी माँ ने ही संभालीं। सीमित परिस्थितियों के बावजूद मेरी माँ ने मुझे आगे बढ़ने और शिक्षा प्राप्त करने के लिए हमेशा प्रेरित किया। मेरी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई और आगे की पढ़ाई के लिए मैंने कांकेर में कॉलेज की शिक्षा प्राप्त की। मेरी पढ़ाई आज भी जारी है, क्योंकि मेरा मानना है कि सीखने की कोई अंतिम सीमा नहीं होती।
समाज के प्रति जिज्ञासा की शुरुआत
समाज के प्रति मेरी जिज्ञासा और रुचि बचपन से ही रही है। हमारे घर में कोई बड़ा सियान या ऐसा व्यक्ति नहीं था जो मुझे सामाजिक बैठकों में ले जाता, फिर भी मैं बचपन से ही सामाजिक गतिविधियों को करीब से देखने और समझने के लिए उत्सुक रहता था।
जब मैं लगभग कक्षा 9वीं का विद्यार्थी था, तभी से मैंने सामाजिक बैठकों और कार्यक्रमों में जाना शुरू कर दिया था। शुरुआत में मैं दिन के समय होने वाली बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों में ही शामिल होता था। जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ती गई, सामाजिक गतिविधियों के प्रति मेरी रुचि भी बढ़ती गई और धीरे-धीरे रात में होने वाली सामाजिक बैठकों में भी जाने लगा।
समय के साथ समाज में मेरा उठना-बैठना बढ़ता गया। समाज की छोटी-बड़ी गतिविधियों में भाग लेना मुझे अच्छा लगने लगा। जब भी कहीं समाज के बारे में चर्चा होती, मैं उसे बहुत धैर्य और उत्सुकता से सुनता था। इन चर्चाओं और बैठकों ने मुझे अपने समाज को बहुत करीब से जानने और समझने का अवसर दिया।
आज भी समाज को जानने, समझने और उसके इतिहास, संस्कृति, परंपरा तथा वर्तमान परिस्थितियों के बारे में सीखने की मेरी जिज्ञासा लगातार बनी हुई है।
राजा राव पठार का वह अनुभव
मेरी सामाजिक यात्रा में एक ऐसी घटना भी है, जिसने मेरे मन पर बहुत गहरा प्रभाव डाला और शायद उसी ने मेरे जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जब मैं छोटा था, उस समय जिला धमतरी के राजा राव पठार में आदिवासी कार्यक्रम और वीर मेला आयोजित हुआ था। मैं भी अपने गाँव के लोगों के साथ ट्रैक्टर से वीर मेले में पहुँचा था।
मेरे अंदर उस समय बहुत उत्साह था। मैं अपने दोस्तों के साथ मेले का आनंद ले रहा था। वहाँ अलग-अलग समाजों के पेन, कॉपी, पुस्तकें, सीडी, कैसेट, ध्वज और अन्य सामग्री बिक रही थी। मेरे दोस्तों ने अपने-अपने समाज से संबंधित सामग्री खरीदनी शुरू की।
उन्हें देखकर मेरे मन में भी इच्छा हुई कि मैं अपने समाज की कोई चीज खरीदूँ। मैंने सोचा कि हमारे समाज का भी पेन होगा, कॉपी होगी, पुस्तक होगी या कोई ध्वज होगा।
मैं एक दुकान से दूसरी दुकान तक जाता रहा।
लेकिन मुझे अपने समाज से संबंधित ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली।
उस समय मैं एक अबोध बालक था। मुझे इस बात की बहुत निराशा हुई। मेरे मन में बार-बार यही सवाल उठ रहा था कि हमारा समाज इतना बड़ा होने के बावजूद हमारे पास अपनी पहचान से जुड़ी सामग्री क्यों नहीं है?
मेरे दोस्तों के पास उनके समाज की चीजें थीं, लेकिन मेरे पास अपने समाज की कोई वस्तु नहीं थी।
उस छोटी-सी घटना ने मेरे बाल मन को बहुत गहराई से प्रभावित किया।
माँ से कही वह बात
जब मैं घर वापस आया तो मैंने अपनी माँ से कहा कि मेरे दोस्त अपने समाज की चीजें खरीदकर लाए हैं—किसी ने पेन खरीदा, किसी ने कॉपी, किसी ने दूसरी सामग्री—लेकिन मैं अपने समाज की कोई चीज नहीं खरीद पाया।
मैंने माँ से कहा कि हमारे समाज की ऐसी चीजें क्यों नहीं बनतीं? हम सिर्फ समाज की बातें ही क्यों करते रहते हैं?
माँ ने उस समय कुछ नहीं कहा।
लेकिन मेरे मन में उसी दिन एक संकल्प पैदा हुआ।
मैंने मन ही मन ठान लिया कि मैं अपने समाज के लिए वह सब बनाने और करने का प्रयास करूँगा, जो अभी तक नहीं हुआ है।
मैं अपने समाज को आगे बढ़ाने के लिए कुछ करूँगा।
यही विचार धीरे-धीरे मेरे जीवन का उद्देश्य बनता गया।
सामाजिक कार्यों की ओर कदम
समय बीतता गया और मैं सामाजिक गतिविधियों में अपना सहयोग देता गया। छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से शुरुआत हुई और धीरे-धीरे समाज की विभिन्न गतिविधियों में मेरी भागीदारी बढ़ती गई।
मैंने समाज को केवल बाहर से देखने के बजाय उसे समझने का प्रयास किया। समाज की समस्याओं, हमारी परंपराओं, संस्कृति, इतिहास, सामाजिक व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को समझने की कोशिश करता रहा।
मेरा मानना है कि किसी भी समाज की उन्नति केवल कुछ लोगों के प्रयास से नहीं होती। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
सामाजिक सेवा के पीछे मेरा उद्देश्य
मेरी इच्छा हमेशा से रही है कि हमारे समाज के लोग बिना किसी स्वार्थ के सामाजिक सेवा करें और अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझें।
यदि हम सभी अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के विकास के लिए काम करें, तो हमारा समाज भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है और दूसरे समाजों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
लेकिन सामाजिक कार्यों के दौरान कई बार ऐसे अनुभव भी हुए, जब लोगों ने उत्साह बढ़ाने के बजाय हतोत्साहित करने का प्रयास किया।
कभी-कभी यह भी सुनने को मिला—
“बड़ा आया सामाजिक कार्यकर्ता।”
“ऐसे तो बहुत देखे हैं।”
“इतने बड़े-बड़े सियान लोग नहीं कर पाए, ये क्या कर लेगा?”
पहले ऐसी बातें सुनकर दुख होता था। लगता था कि शायद लोग मेरे प्रयासों को समझ नहीं रहे हैं।
लेकिन अब इन बातों से मुझे फर्क नहीं पड़ता।
क्योंकि मैंने यह समझ लिया है कि अच्छा काम करने वाले व्यक्ति को भी कभी-कभी आलोचना का सामना करना पड़ता है।
अगर उद्देश्य स्पष्ट हो तो आलोचना रास्ता रोक नहीं सकती।
मेरा संकल्प
आज मैंने अपने मन में यह ठान लिया है कि कोई कुछ भी कहे, मुझे अपने समाज के लिए काम करते रहना है।
मुझे समाज से कोई पद नहीं चाहिए।
मुझे समाज से पैसा नहीं चाहिए।
मुझे किसी प्रकार का व्यक्तिगत लाभ भी नहीं चाहिए।
मेरी इच्छा केवल इतनी है कि मेरा समाज हर क्षेत्र में आगे बढ़े।
हमारी आने वाली पीढ़ियाँ अपने इतिहास, संस्कृति, परंपरा और पहचान को समझें। हमारे समाज के बच्चों को शिक्षा, ज्ञान और अवसर मिलें। समाज के लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझें और एक-दूसरे का सहयोग करें।
मेरा उद्देश्य
मेरे लिए सामाजिक कार्य कोई पद या प्रतिष्ठा प्राप्त करने का माध्यम नहीं है।
यह मेरे जीवन का एक उद्देश्य है।
मैं चाहता हूँ कि हमारा समाज—
शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े।
सामाजिक रूप से जागरूक बने।
अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझे।
अपने इतिहास को संरक्षित करे।
नई पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़े।
तकनीक और आधुनिक संसाधनों का सही उपयोग करे।
आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बने।
आपसी सहयोग और एकता को बढ़ावा दे।
समाज के प्रतिभाशाली लोगों को आगे बढ़ने का अवसर दे।
मेरा विश्वास है कि समाज का विकास केवल भाषणों और बैठकों से नहीं, बल्कि ज्ञान, शिक्षा, संगठन, सहयोग और निरंतर कार्य से होगा।
मेरी मंजिल
मैंने अपने जीवन में एक बात तय कर ली है—
जब तक जीवन है, तब तक समाज की उन्नति और विकास के बारे में सोचता रहूँगा और अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करता रहूँगा।
मेरी यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। बल्कि यह तो एक निरंतर चलने वाली यात्रा है।
आज जो कुछ भी कर रहा हूँ, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक छोटी-सी नींव रखने का प्रयास है।
मेरा सपना है कि एक दिन हमारे समाज को किसी दूसरे समाज से अपनी पहचान की सामग्री, ज्ञान या संसाधन पाने की आवश्यकता न पड़े। हम स्वयं अपनी किताबें लिखें, अपनी संस्कृति का दस्तावेजीकरण करें, अपनी पहचान से जुड़ी सामग्री तैयार करें, अपने इतिहास को सुरक्षित रखें और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करें।
न मुझे पद चाहिए, न पैसा और न व्यक्तिगत प्रतिष्ठा।
मेरा उद्देश्य केवल अपने समाज की उन्नति, विकास और सम्मान है।
और यही मेरा संकल्प है—
“समाज के लिए सीखना, समाज के लिए काम करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ ऐसा छोड़ जाना, जिसे वे गर्व के साथ आगे बढ़ा सकें।”
मेरे द्वारा किए गए कुछ प्रमुख कार्य
मेरी सामाजिक यात्रा में अब तक किए गए विभिन्न छोटे-बड़े कार्यों, सामाजिक पहलों, लेखन, प्रकाशनों, शोध, डिजिटल परियोजनाओं और अन्य गतिविधियों का विवरण नीचे प्रस्तुत किया जाएगा।
🌿 परंपरा
🎵 लोकसंस्कृति
🏹 आदिवासी विरासत
🪶 लोककला